डीटीसी बस में । हिंदी हास्य व्यंग्य कविता । अशोक चक्रधर । Humour Satire Poem DTC Bus Mein Ashok



Ashok Chakradhar is a renowned Hindi poet, writer and a media personality. He has been a professor and head of the department of Hindi at Jamia Millia Islamia (Central University). After serving for 29 years, he took voluntary retirement to focus on working towards the propagation and development of the Hindi language. His contribution has been crucial in the standardization of Hindi for computers. In 2007 he became the Hindi co-ordinator at the Institute of Life Long Learning (ILLL) at the University of Delhi and in 2009 was appointed as the Vice Chairman of Hindi Academy, Government of Delhi and as the Vice Chairman of the Kendriya Hindi Shikshan Mandal, Ministry of HRD, Government of India. He is a celebrated poet, widely known for his unique style of poetry. His illustrious presence in kavisammelans or poetry recitals for almost half a century in India & abroad has made him a household name, especially in the genre of humour and satire.Prof. Chakradhar is the recipient of several awards and honours. Some prestigious awards are Government of India’s Padmashri, UP Government’s ‘Yash Bharti’ and ‘Vidya Bhooshan Sammaan’.

अशोक चक्रधर एक संजीदा समीक्षक, लेखक, प्रोफेसर, मीडियाकर्मी और लोकप्रिय कवि हैं। जामिआ मिल्लिआ इस्लामिया नामक विश्वविद्यालय में तीस बरस तक ये हिन्दी पढ़ाते रहे। अनेक वर्ष विभागाध्यक्ष रहे तथा देश में पहली बार किसी हिन्दी विभाग को मीडिया अध्ययन से जोड़ा। ये देश-विदेश के कविसम्मेलनों के लिए एक महत्वपूर्ण कवि हैं। ‘क़हक़हे’ से लेकर ‘रंग-तरंग तक ‘पोल टॉप टैन’ से लेकर ‘छोटी सी आशा’ तक और ‘वाह वाह’ से लेकर ‘चकल्लस’ तक, ‘मेरी बात’ से लेकर ‘पत्रिका’ तक पिछले चार दशक से टी.वी. पर मौजूद हैं। दूरदर्शन पर इनके साप्ताहिक कार्यक्रम ‘चले आओ चक्रधर चमन में’ ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। अशोक चक्रधर ने अपनी मल्टी-मीडिया प्रस्तुतियों से हिन्दी को हाई-टैक करने की पहल करी। मंचीय हास्य-व्यंग्य को अपने विशिष्ट संचालन-कौशल के साथ नए-नए आयाम दिए। साठ से अधिक पुस्तकों के लेखक प्रो. चक्रधर हिन्दी पत्रकारिता में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए नियमित स्तम्भ लेखन भी कर रहे हैं। ये एक सम्पूर्ण मीडिया-व्यक्तित्व हैं। प्रो. अशोक चक्रधर दिल्ली विश्वविद्यालय के जीवंपर्यंत शिक्षण संस्थान के हिंदी समंवयक, केन्द्रीय हिन्दी शिक्षण मण्डल (मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार) एवं हिन्दी अकादमी (दिल्ली सरकार) के उपाध्यक्ष रहे। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शताधिक पुरस्कारों और सम्मानों से नवाज़े गए डॉ. अशोक चक्रधर भारत के राष्ट्रपति द्वारा ‘पद्मश्री’ की उपाधि से भी अलंकृत किए जा चुके हैं। कुछ अन्य उल्लेखनीय प्रतिष्ठित सम्मान एवं पुरस्कार हैं– ‘आकाशवाणी अवार्ड’ (आकाशवाणी, भारत सरकार), सर्वश्रेष्ठ लेखन निर्देशन पुरस्कार (फ़िल्म फ़ेस्टीवल निदेशालय, भारत सरकार), ‘यशभारती सम्मान’ एवं ‘विद्याभूषण सम्मान’ (उत्तर प्रदेश सरकार), ‘दिल्ली के गौरव’ ‘बाल साहित्यकार पुरस्कार’, ‘काका हाथरसी पुरस्कार’ (दिल्ली सरकार), ‘आदित्य-अल्हड़ सम्मान’ (हरियाणा सरकार), ‘हास्य रत्न’, ‘राष्ट्रभाषा समृद्धि सम्मान’, ‘त्रिनिदाद हिन्दी शिखर सम्मान’, ‘कैफ़ी आज़मी अवार्ड’, ‘साहित्य शिरोमणि, न्यूयॉर्क अवार्ड’, माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी द्वारा ‘मोस्ट वेल्युएबल प्रोफेशनल (एम.वी.पी.) अवार्ड’ आदि।

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Fahad Hameed

Fahad Hashmi is one of the known Software Engineer and blogger likes to blog about design resources. He is passionate about collecting the awe-inspiring design tools, to help designers.He blogs only for Designers & Photographers.

2 thoughts on “डीटीसी बस में । हिंदी हास्य व्यंग्य कविता । अशोक चक्रधर । Humour Satire Poem DTC Bus Mein Ashok

  • July 3, 2018 at 11:52 pm
    Permalink

    उमर कट जाती हैं खडे खडे
    कट जाते हैं टिकट खडे खडे
    कै दशक मिलते थे आश्वासन
    फिर मिलने लगे वादे
    'अब की बार' मिल रहे हैं
    "जुमले" बडे बडे!
    उमर कट जाती हैं खडे खडे

    आम आदमी की
    निराशा
    आम आदमी की उदासी
    आम आदमी की
    बेबसी से स्पर्धा करते
    हुये
    सडक के गड्डे भी
    हो रहे हैं बडे बडे!!
    हम तो भय्या
    सफर को suffer कर रहे हैं
    खडे खडे…!!

    सुबह सात पैतीस की
    सात दस को ही निकल जाये,हमे गम नही
    शाम पांच बिस की
    छह तीस को आये हमे गम नही..
    "बस" ही तो हैं कोई अप्सरा नही
    जो कुंवारो के भाग उजाडे
    हम तो इंतजारी बन गये हैं खडे खडे!!!

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  • July 3, 2018 at 11:52 pm
    Permalink

    अब कि बस , बस की कार ज्यादा लगती हैं। 2013 से पहले वाली बस कि बात है कुछ और थी।

    Reply

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